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हम धर्म को चरित्र-निर्माण का सीधा मार्ग और सांसारिक सुख का सच्चा द्वार समझते हैं। हम देश-भक्ति को सर्वोत्तम शक्ति मानते हैं जो मनुष्य को उच्चकोटि की निःस्वार्थ सेवा करने की  ओर प्रवृत्त करती है।
- मालवीय जी

मालवीय मूल्य अनुशीलन केन्द्र
एक परिचय

आज संसार में अनेक देश है और प्रत्येक राष्ट्र की अपनी एक विशिष्टता है, यह विशिष्टता उस देश के लोगों द्वारा निर्मित्त है। क्योंकि कोई भी देश वहाँ बसे व्यक्तियों से बना है, जिस प्रकार एक-एक ईंट से मकान बनता है, और यह ईंट जितनी मजबूत होगी मकान उतना ही मजबूत होगा। उसी प्रकार जब तक एक-एक व्यक्ति शिक्षित नहीं होगे। वह देश मजबूत कैसे होगा? क्योंकि शिक्षा ही वह माध्यम है, जो एक व्यक्ति का सर्वांगीण विकास कर सकता है और जिस देश के नागरिक सुशिक्षित व प्रतिभा सम्पन्न होंगे वह राष्ट्र खुद व खुद उन्नति के पथ पर अग्रसर होता जाएगा। कोठारी शिक्षा आयोग ने इस सन्दर्भ में मत व्यक्त किया है, भारत के भाग्य का निर्माण उसकी कक्षाओं में हो रहा है। विद्यालयों एवं महाविद्यालयों से निकलने वाले विद्यार्थियों की योग्यता और संख्या पर ही राष्ट्रीय निर्माण की उस महत्त्वपूर्ण कार्य की सफलता निर्भर करेगी जिनसे हमारे रहन-सहन का स्तर उच्च हो सकेगा।
इसलिए यह दायित्व विद्यालयों पर और भी बढ़ जाता है। इन विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थी हमारे देश की नींव हैं और इन विद्यालयों द्वारा विद्यार्थियों को प्रदत्त ज्ञान जितना उन्नत होगा हमारा देश उतनी ही तीव्रता से उन्नति के मार्ग पर प्रशस्त होगा। जिसकी कामना हम सभी भारतवासी मिलकर करते हैं जैसा कि राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त उद्धृत करते हैं -

मानस भवन में आर्यजन जिसकी उतारें आरती,
भगवान् भारत वर्ष में गूँजे हमारी भारती।
हो भव्य भावोद्भाविनी वह भारती हे भगवते!
सीतापते! सीतापते!! गीतामते! गीतामते!! ।।

इस आदर्श की प्राप्ति के लिये बौद्धिक क्षमता के साथ-साथ देश के भविष्य निर्माताओं की नैतिक, सांस्कृतिक और मानवीय मूल्य चेतना भी विकसित होनी चाहिए। शिक्षा द्वारा मानव विकास के इस मूल्यात्मक पक्ष के महत्त्व को हमारे विश्वविद्यालय के संस्थापक, महामना मालवीय जी ने भली-भांति समझ लिया था। आज से सौ वर्ष पूर्व, 1905 में प्रकाशित काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की प्रस्तावना में उन्होंने लिखा था-
व्यक्ति और समाज की उन्नति के लिए बौद्धिक विकास से भी अधिक महत्त्वपूर्ण है चारित्रिक विकास ।......मात्र औद्योगिक प्रगति से ही कोई देश खुशहाल, समृद्ध और गौरवशाली राष्ट्र नहीं बन जाता।...........अतः युवाओं का चरित्र निर्माण करना प्रस्तावित विश्वविद्यालय का एक प्रमुख लक्ष्य होगा। उच्च शिक्षा द्वारा यहाँ केवल अभियंता, चिकित्सक, विधि-वेत्ता, वैज्ञानिक, शास्त्रज्ञ विद्वान ही नहीं तैयार कियें जाएँगे, वरन् ऐसे व्यक्तियों का निर्माण किया जाएगा जिनका चरित्र उज्ज्वल हो, जो कत्र्तव्य परायण और मूल्यनिष्ठ हों। यह विश्वविद्यालय केवल अर्जित ज्ञान के स्तर को प्रमाणित कर डिग्रियां देने वाली संस्था न होकर सुयोग्य सच्चरित्र नागरिकों की पौधशाला होगा।
महामना के इन उत्कृष्ट विचारों से प्रेरणा लेकर सन् 1991 में मालवीय मूल्य अनुशीलन केन्द्र का उद्घाटन हुआ था।

हमारे लक्ष्य: केन्द्र के लक्ष्य हैं, आधुनिक शिक्षा व्यवस्था एवं आधुनिक समाज के अन्य घटकों (उद्योग जगत, सरकारी कर्मचारी, सामान्य जन आदि) में नैतिक एवं मानवीय मूल्यों की प्रतिस्थापना। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए केन्द्र ने तीन उद्देश्य अपने सामने रखे हैं 

  • विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के लिए मूल्य-शिक्षा के कार्यक्रमों का आयोजन करना।

  • आज के जीवन में उभरते मूल्यगत प्रश्नों एवं समस्याओं का अन्वेषण/विश्लेषण करना और उन्हें हल करने के लिए उपाय प्रस्तावित करना।

  • विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत अधिकारियों, प्रबंधकों, वैज्ञानिकों, शिक्षकों तथा अन्य विशेषज्ञों के लिए नैतिक एवं मानवीय मूल्यों पर आधारित प्रशिक्षण, कार्यशालाओं का आयोजन करना।

  • हमारे कार्यक्रम: इन उद्देश्यों को पूरा करने के लिए केन्द्र संप्रति निम्नांकित कार्यक्रमों का संचालन कर रहा है-

  • विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के लिए प्रतिवर्ष दो/तीन सप्ताह की एक कार्यशाला। इस कार्यशाला में विभिन्न विषयों पर प्रतिदिन सायंकाल दो घण्टे की संवादात्मक प्रस्तुतियाँ होती है। प्रायः एक सौ विद्यार्थी प्रतिवर्ष इस कार्यशाला में भाग लेते हैं।

  • इन कार्यशालाओं के प्रतिभागियों को प्रेरित किया जाता है कि वे स्वैच्छिक रूप से समाज सेवा एवं मानव सेवा के कार्यक्रमों में अपना योगदान दें। विद्यार्थियों द्वारा किये जा रहे कुछ ऐसे कार्यक्रम हैं:

  • (1) अंध विद्यालय, वृद्धाश्रम एवं अनाथालय में सहायता कार्य।
    (2) विश्वविद्यालय के चिकित्सालय में आए असहाय रोगियों की सेवा, उनके लिए रक्तदान एवं दवाओं की व्यवस्था।
    (3) समाज के पिछड़े वर्ग के बच्चों के लिए अनौपचारिक शिक्षण कार्य।
    (4) पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता अभियान।

    • विश्वविद्यालय के शोधकत्र्ताआंे अध्यापकों एवं अधिकारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला।

    • औद्योगिक एवं व्यापारिक प्रतिष्ठानों के प्रबन्धकों के लिए एक सप्ताह की पूर्णकालिक कार्यशाला, जिसका शीर्षक है, "Human Values for Pursuit of Excellence"

    • मूल्य विमर्श अर्द्धवार्षिक पत्रिका का प्रकाशन ।

    • केन्द्र यह भी प्रयास कर रहा है कि नैतिक एवं मानवीय मूल्यों से जुड़े विषय विद्यार्थियों के औपचारिक पाठ्यक्रमों में भी शामिल किए जायँ। ऐसा एक विषय, ^^Human Values"प्रौद्योगिकी संस्थान के बी0टेक (तृतीय वर्ष) के छात्रों को एक ऐच्छिक विषय के रूप में पिछले दस वर्षों से पढ़ाया जा रहा है। दो अन्य विषयों के पाठ्यक्रम विकसित करने का काम भी हाथ में लिया गया है। ये हैं-Environmental, Ethics और  Bio-ethics । आने वाले वर्षों में ऐसे ही अन्य विषयेा के पठन-पाठन की व्यवस्था भी केन्द्र द्वारा की जाएगी।

    • प्रतिवर्ष विवेकानन्द जयंती 12 जनवरी युवा दिवस पर विद्यार्थियों के लिये संगोष्ठी एवं व्याख्यान । 

    • नैतिक एवं मानवीय मूल्यों से जुड़े विषयों पर संगोष्ठियों एवं विशिष्ट व्याख्यानों का आयोजन।

    • विश्वविद्यालय के शोधकत्र्ताआंे अध्यापकों एवं अधिकारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला।

    • औद्योगिक एवं व्यापारिक प्रतिष्ठानों के प्रबन्धकों के लिए एक सप्ताह की पूर्णकालिक कार्यशाला, जिसका शीर्षक है, "Human Values for Pursuit of Excellence"

    • मूल्य विमर्श अर्द्धवार्षिक पत्रिका का प्रकाशन ।

    • केन्द्र यह भी प्रयास कर रहा है कि नैतिक एवं मानवीय मूल्यों से जुड़े विषय विद्यार्थियों के औपचारिक पाठ्यक्रमों में भी शामिल किए जायँ। ऐसा एक विषय, ^^Human Values"प्रौद्योगिकी संस्थान के बी0टेक (तृतीय वर्ष) के छात्रों को एक ऐच्छिक विषय के रूप में पिछले दस वर्षों से पढ़ाया जा रहा है। दो अन्य विषयों के पाठ्यक्रम विकसित करने का काम भी हाथ में लिया गया है। ये हैं-Environmental, Ethics और  Bio-ethics । आने वाले वर्षों में ऐसे ही अन्य विषयेा के पठन-पाठन की व्यवस्था भी केन्द्र द्वारा की जाएगी।

    • प्रतिवर्ष विवेकानन्द जयंती 12 जनवरी युवा दिवस पर विद्यार्थियों के लिये संगोष्ठी एवं व्याख्यान । 

    • नैतिक एवं मानवीय मूल्यों से जुड़े विषयों पर संगोष्ठियों एवं विशिष्ट व्याख्यानों का आयोजन।

    हमारे भावी प्रयास: मूल्य शिक्षा के इन प्रयासांे के अतिरिक्त नैतिक एवं मानवीय मूल्य-चिंतन को आधुनिक संदर्भ में एक व्यवस्थित ज्ञानधारा के रूप में विकसित करना भी केन्द्र का लक्ष्य है। इसके लिए हमें अध्येताओं, विद्वानों एवं चिंतकों का एक ऐसा समूह तैयार करना होगा जो अपने विचारों एवं लेखन से इस नयी ज्ञानधारा को गति दें। पहले का अधिकांश मूल्य चिंतन व्यक्ति-केन्द्रित रहा है। अर्थात् इसका प्रयास रहा है, कैसे किसी व्यक्ति को मूल्यनिष्ठ बनाया जाय। आज उतना ही आवश्यक यह हो गया है कि कैसे सामाजिक व्यवस्था को मूल्यनिष्ठ बनाया जाय? कैसे उसके आर्थिक, राजनैतिक, प्रशासनिक तंत्र की गतिविधियों में, उनकी नीति निर्धारण प्रक्रियाओं में नैतिक एवं मानवीय मूल्यों का समावेश किया जाय? इस प्रकार के सामाजिक व्यवस्था केन्द्रित मूल्य चिंतन द्वारा नए विचारों को जन्म देना आज मानवहित एवं समाजहित के लिए अत्यावश्यक हो गया है। मूल्य-चिंतन को इन नयी दिशाओं में प्रवहमान करने के लिए यह केन्द्र प्रयासरत रहेगा।

    आधुनिक यांत्रिक-औद्योगिक सभ्यता ने तथा वैश्विक अर्थव्यवस्था ने ऐसी विकराल वैश्विक समस्याओं को जन्म दिया है जिनसे आज मानव जाति के अस्तित्व पर ही प्रश्नचिन्ह लगने लगे हैं। विश्व के अनेक प्रबुद्ध दार्शनिक एवं विचारक यह मानते हैं कि इन समस्याओं को हल करने के लिए हमें आज एक नए, समन्वयात्मक, मानवतावादी मूल्य-दर्शन की आवश्यकता है। इस वैश्विक मूल्य-चिंतन में भारतीय विश्व-दृष्टि और जीवन-दृष्टि महत्त्वपूर्ण योगदान कर सकती है। विचार-जगत में सक्रियता की इन नई दिशाओं में भी केन्द्र अपनी समुचित भूमिका निभाने का प्रयास करेंगा।
    हमारा प्रयास होगा कि मालवीय मूल्य अनुशीलन केन्द्र मूल्य-शिक्षा एवं मूल्य-चिंतन के क्षेत्र में एक अग्रणी राष्ट्रीय केन्द्र के रूप में विकसित हो। इस बड़े उद्देश्य को पाने के लिए प्रचुर संसाधनों की आवश्यकता होगी। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय ने अपने उद्देश्यों की पूर्ति हेतु शासकीय सहायता की अपेक्षा जन-सहयोग को अधिक महत्त्व दिया है। इसी परंपरा के अनुरूप हम आशा करते हैं कि आज के प्रबुद्ध एवं सक्षम जन, विशेषतः विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रगण, इस केन्द्र के विकास में हमें अपना वैचारिक तथा आर्थिक सहयोग खुले दिल व मुक्त हस्त से देंगे।

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