Faculty of Social Sciences

Banaras Hindu University,Varanasi-221005
  

सामाजिक विज्ञान संकाय

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प्रख्यात् संस्थापक महामना पण्डित मदन मोहन मालवीय जी की दिब्य दृष्टि के तहत सामाजिक विज्ञान संकाय उत्कृष्टता की खोज में अनवरत संघर्षरत है तथा राष्ट्रीय एवं वैष्विक समुदाय के बीच सामाजिक तथा राजनैतिक चुनौतियों का सामना करने के लिए रचनातत्मक ढंग से मध्यस्थता करता रहा है।

वास्तव में बिना विवेचक और प्रषिक्षित सामाजिक वैज्ञानिकों के न तो भारत जैसे विकासषील देष का सामाजिक और राजनैतिक विकास ही कर सकते हैं और न हीं व्यक्ति, समुदाय और राष्ट्रों के बीच व्याप्त अन्तर को ही समाप्त कर सकते हैं। इस प्रकार परिवर्तन की षक्ति के रूप में नये उत्साह के साथ यह सामाजिक विज्ञान संकाय सन् 1971 में सृजित हुआ जिसमें अर्थषास्त्र, इतिहास, राजनीतिषास्त्र, मनोविज्ञान तथा समाजषास्त्र पांच विभाग षामिल हैं। इसके अतिरिक्त स्वतंत्र पाँच केन्द्र के रूप में नेपाल अध्ययन (स्थापित- 1976), महिला अध्ययन एवं विकास केन्द्र (स्थापित- 1987), मालवीय अनुषीलन केन्द्र (स्थापित- 1998), समन्वित ग्रामीण विकास केन्द्र (स्थापित- 1980) और निषेध एवं संयुक्त नीति अध्ययन केन्द्र (स्थापित- 2009)है। इसी क्रम में राजनीति विज्ञान विभाग का एक केन्द्र राज्य सरकार और मनोविज्ञान विभाग का केन्द्र मार्गदर्षन और लक्ष्य के लिये कार्य करता है।

इस संकाय के विषिष्ट प्रो. ए.के. दास गुप्त, कैम्ब्रिज विष्वविद्यालय, यू.के., प्रो.ए.एस. रतूरी, हार्वर्ड विष्वविद्यालय, प्रो. आर एन. भार्गव- ओहियो विष्वविद्यालय एवं मिसौरी में विजिटिंग प्रोफेसर के रूप में कार्यरत थें। हाल में संकाय के दो सामाजिक वैज्ञानिक, भारत-फ्रांस सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत फ्रांस आमंत्रित हुए थे। संकाय के षिक्षकों की करीब 50 पुस्तकें तथा सैकड़ो शोध प्रपत्र विभिन्न विषयों से सम्बन्धित राष्ट्रीय एवं अन्र्तराट्रीय ख्यातिलब्ध पत्रिकाओं में प्रकाषित हुये हैं। संकाय समय-समय पर महान विद्वानों द्वारा महत्वपूर्ण विषयों पर विषेष व्याख्यान को आयोजित कराता रहा हैं। 

इसी क्रम में संकाय द्वारा नवीन स्नातकोत्तर सेमिनार हाल में दिसम्बर 2, 2010 को ’‘भारत के आर्थिक विकास में षिक्षा एक अवयव’‘ शीर्षक पर माननीय कुलपति प्रो. बी.बी. भट्टाचार्य, जवाहर लाल नेहरू विष्वविद्यालय नई दिल्ली द्वारा एक विषेष व्याख्यान का आयोजन किया गया जहां षिक्षक एवं विद्यार्थी समुदाय ने प्रो. भट्टाचार्य के विचारों को धैर्यपूर्वक सुना तथा विचार विनिमय कर सहभागिता भी की। व्याख्यान के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाले घटकों पर वृहद रूप से चर्चा की गयी। प्रो. भट्टाचार्य ने विषेष रूप से भारत के आर्थिक विकास में अन्य देषो की अर्थव्यवस्था से तुलना करते हुए, षिक्षा की अहम भूमिका को दर्षाया। 

माननीय कुलाधिपति डा. कर्ण सिंह, का. हि. वि. द्वारा हिन्दी भवन के पीछे एक भव्य व्याख्यान कक्ष का उद्घाटन दिनांक 12 मार्च, 2011 को किया गया। उक्त अवसर पर माननीय कुलपति प्रो. डी.पी. सिंह, का.हि.वि.वि., प्रो. बी.डी. सिंह. कुलगुरू, का.हि.वि.वि., प्रो. ए.के. जैन, संकाय प्रमुख सामाजिक विज्ञान संकाय एवम् प्रो. कमलषील, संकाय प्रमुख, कला संकाय तथा अन्य सम्मानित विद्वत वर्ग एवं कर्मचारी उपस्थित थें।